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Top place for trekking in Maharashtra. महाराष्ट्र में ट्रेकिंग के लिए 10 सबसे बढिया जगह


Top place for trekking in Maharashtra. महाराष्ट्र में ट्रेकिंग के लिए 10 सबसे बढिया जगह. 

सह्याद्री सीमा उन लोगों के लिए सबसे अच्छे मानसून गेटवे प्रदान करता है जो महाराष्ट्र में ट्रेकिंग पर जाना चाहते हैं. महाराष्ट्र, अपने कई हिल स्टेशनों के साथ, ट्रेकिंग के लिए सही अवसर प्रदान करता है. कुछ ट्रेकिंग ट्रेल्स प्राकृतिक स्थलों के माध्यम से अपना रास्ता बनाते हैं, जबकि अन्य ऐतिहासिक खंडहरों से घिर जाते हैं. महाराष्ट्र में कही ऐसे ट्रेकिंग की जगह है जहा आप कैम्पिंग, वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़ी, रिवर राफ्टिंग और कई अन्य खेलों का आनंद ले सकते हैं. यह ब्लॉग आपको महाराष्ट्र के 10 सर्वश्रेष्ठ ट्रेक लाता है.


   

1.  
लोहगड किला 


लोकेशन: पुणे, महाराष्ट्र, भारत

कैसे पहुचे: ट्रैन के जरिए- पुणे जाने वाली ट्रैन पकड़े फिर लोनावला स्टेशन पर उतरकर वह़ा से लोकल के जरिए मालवली स्टेशन पर से लोहगड के लिए ऑटो पकड़े.             
रोड के जरिए – आप रोड से लोनावला जाकर वहा से लोहगड जा सकते है. यहा आप गुगल मॅप के जरीए आसानी से पहुच सकते है. 

जानकारी: लोहागड भारत में महाराष्ट्र राज्य के कई पहाड़ी किलों में से एक है. लोहागड लोनावाला और पुणे के उत्तर-पश्चिम में 52 किमी दूर स्थित है, लोहागड समुद्र तल से 1,033 मीटर (3,389 फीट) की ऊंचाई पर है. किला एक छोटी सी सीमा द्वारा पड़ोसी विशापुर किले से जुड़ा हुआ है. शिवाजी महाराज ने सन 1648 में लोहागड किले पर कब्जा कर लिया, लेकिन उन्हें सन 1665में पुरंदर की संधि की वजह से मुगलों के सामने किले का समर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा. शिवाजी महाराज ने सन 1670 में किले को फिर से अपना बनाया और इसका इस्तेमाल अपने खजाने को रखने के लिए किया.

जाने के लिए सबसे अच्छा समय: लोहागढ़ किले पर जाने के लिए सबसे अच्छा समय मानसून के मौसम के दौरान है, जब बारिश आसपास के वातावरण को ताजा और चमकीला बना देती है. लोहगड सुबह 9 से शाम 6 बजे तक ही खुला रहता है. किले पर रात में रूकना मना है.

    2.   कलसुबाई शिखर


लोकेशन: बारी, तालुक, अकोले, महाराष्ट्र.

कैसे पहुचे: ट्रैन के जरिए- कसारा रेल्वे स्टेशन पहुचे वहा से लोकल टॅक्सी या फिर ऑटो पकडकर आप कलसुबाई शिखर तक पहुच सकते है.
रोड के जरिए– मुंबई से कसारा - कसारा से ईगतपुरी – ईगतपुरी से घोटी – घोटी से बारी गॉंव (कलसुबाई शिखर)   

जानकारी: कालसुबाई पश्चिमी घाट में एक पर्वत है, जो भारत के महाराष्ट्र राज्य में स्थित है. इसका शिखर १६४६ मीटर (५४०० फीट) की ऊँचाई पर स्थित महाराष्ट्र का सबसे ऊँचा शिखर है. कलसुबाई पर्वत श्रृंखला हरिश्चंद्रगढ़ और वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित है. यह साल भर में उत्साही ट्रेकर्स, कलसुबाई के भक्तों और वन्यजीव देखने के उत्साही लोगों द्वारा समान रूप से दौरा करते है. कलसुबाई पर्वत श्रृंखला का निर्माण उन्हीं ऐतिहासिक घटनाओं द्वारा किया गया था, जिन्होंने पश्चिमी घाट को जन्म दिया था. कलसुबाई शिखर बड़ी संख्या में ट्रेकर्स और भक्तों को आकर्षित करता है. शिखर तक पहुँचने के लिए अच्छी तरह से ट्रेकिंग मार्ग हैं. सबसे लोकप्रिय मार्ग पूर्वी गाँव बारी से है.

जाने के लिए सबसे अच्छा समय: जून से अगस्त में बारीश के मौसम में ट्रेकिंग के लिए, सितबंर से अक्तूबर में ट्रेकिंग के लिए और नवबंर से मई में रात की कैम्पिंग के लिए.

    3.   माथेरान


लोकेशन: मुबंई के पास

कैसे पहुचे: ट्रैन के जरिए- नेरल माथेरान के पास का रेल्वे स्टेशन है आप पुणे स्टेशन या फिर सीएसटी से नेरल के लिए ट्रेन पकड़ सकते है, और नेरल से आप माथेरान के लिए टॉय ट्रेन सेवाओं का विकल्प चुन सकते हैं.
रोड के जरिए– माथेरान मुंबई से 110 किमी दूर स्थित है. आप ट्रेन से माथेरान पहुंच सकता है या नेरल से किराए पर टैक्सी ले सकता है. माथेरान पहुंचने के बाद, आप या तो पैदल यात्रा कर सकते हैं, साइकिल किराए पर ले सकते हैं या हिल स्टेशन पर घोड़े की सवारी कर सकते हैं क्योंकि शहर की सीमा के भीतर वाहनों की अनुमति नहीं है.

जानकारी: माथेरान, मुंबई से मात्र 110 किलोमीटर दूर रायगढ़ जिले में मौजूद है प्राकृतिक खूबसूरती से भरा छोटा सा हिल स्टेशन है. माथेरान में लगभग 38 लुक आउट पॉइंट है. जिसमें पैनोरमा प्वाइंट सहित, जो आसपास के क्षेत्र और नेरल शहर का 360 डिग्री का दृश्य प्रदान करता है. लुईसा प्वाइंट में प्रबल किले के दृश्य हैं. अन्य दृष्टिकोणों में वन ट्री हिल पॉइंट, हार्ट पॉइंट, मंकी पॉइंट, पोरचिइन पॉइंट और रामबाग पॉइंट शामिल हैं. कर्जत तहसील के अंदर आने वाला यह भारत का सबसे छोटा हिल स्टेशन है. बड़े शहरोंसे इसकी निकटता के कारण मातेरान शहरी नागरिकों के लिए एक सप्ताहांत बिताने के लिए लोकप्रिय स्थल है. यहां की खासियत है कि यहां किसी भी प्रकार के वाहन का प्रवेश वर्जित है.  यही वजह है कि यहां का वातावरण मन को शांति प्रदान करता है.

जाने के लिए सबसे अच्छा समय: यहा लोग लगभग पुरे साल घुमने के लिए आते जाते रहते है. लेकीन फिर भी ज्यादातर लोग यहा बारीश और थंड के मौसम में आते है.
  

    4.   रायगड किला


लोकेशन: महाड, रायगड जिला

कैसे पहुचे: रायगढ़ किला महाड में स्थित है. यहा पे सबसे नजदीक वाला बस स्टॅन्ड मुरुड है जो 33 किलोमीटर दुर है. रोड के जरिए– मुंबई से रायगढ़ किले तक पहुँचने के लिए NH17 को लें. लोनेरा फाटा से होते हुए पनवेल-महाड पहुंचे और फिर आप दासगांव से होते हुए सीधे रायगड पहुंच सकते है.
ट्रैन के जरिए- रायगढ़ से सबसे पास का रेलवे स्टेशन वीर दासगाँव रेलवे स्टेशन है, जो रायगढ़ से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. रेलवे स्टेशन से आप रायगढ़ के लिए टैक्सी भी ले सकते हैं.

जानकारी: रायगड़ महाड में स्थित एक पहाड़ी किला है. रायगढ़ किले को छत्रपति शिवाजी महाराज ने जब्त कर लिया था और 1674 में इसे अपनी राजधानी बनाया था, जब उन्हें एक मराठा राज्य के राजा के रूप में ताज पहनाया गया था, जो बाद में मराठा राज्य मराठा साम्राज्य में विकसित हुआ, और अंततः पश्चिमी और मध्य भारत को अपने अंदर शामिल किया. यह किला समुद्र तल से 820 मीटर (2,700 फीट) ऊंचा है और सह्याद्री पर्वत श्रृंखला में स्थित है. किले तक जाने के लिए लगभग 1737 सीढ़ियाँ हैं. रायगड़ में रोपवे की सुविधा 10 मिनट में किले के शीर्ष तक पहुंचने के लिए मौजूद है. रायगड़ का किला छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा बनाया गया था और मुख्य वास्तुकार हीरोजी इंदुलकर थे.

जाने के लिए सबसे अच्छा समय: रायगढ़ किले की यात्रा के लिए ठीक समय नवंबर से मार्च के दौरान है क्योंकि यहां सर्दियां कड़ी नहीं होती हैं. मौसम सुहावना बना रहता है, और आप सर्दियों के दौरान सबसे अधिक ट्रेकिंग या रोपवे का आनंद लेंगे. रायगढ़ में गर्मी के मौसम आना अच्छा आयडीया नही है, क्योंकि पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है.

    5.   ब्रम्हगिरी


लोकेशन: त्र्यबंकेश्वर, नाशिक.

कैसे पहुचे: आपको ब्रम्हगिरी जाने के नाशिक से सीधे त्र्यबंकेश्वर कि बस लेनी पड़ती है.  

जानकारी: ब्रम्हगिरी महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में एक पर्वत श्रृंखला है. जो नाशिक जिले में स्थित है. इस जगह के पास ही त्रयंबकेश्वर शिव मंदिर स्थित है. पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम ब्रम्हगिरी से ही होता है. यह नदी 1,465 किलोमीटर (910 मील) तक बहती है. ब्रह्मगिरि के इलाके प्रकृति की सैर और ट्रैकिंग जैसी साहसिक यात्राओं के लिए चुनौतीपूर्ण स्थान हैं. कई ट्रेकिंग ट्रेल्स जंगली पेड़ों के बीच बसे हैं. पर्वतमाला प्राकृतिक आकर्षण और प्राकृतिक स्थलों से समृद्ध हैं. ब्रह्मगिरि (1298 मीटर) त्र्यंबकेश्वर के पश्चिम में है और यह किला ठाणे जिले के जव्हार मोखडा क्षेत्र का एक शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है. त्र्यंबकेश्वर अपने आप में एक पवित्र स्थल है क्योंकि यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है.
त्र्यंबकेश्वर के पास में ही हरीहर किला है और दुगरवाडी का झरना भी है.

जाने के लिए सबसे अच्छा समय: जुन से लेकर जनवरी तक का समय यहा ट्रेकिंग के लिए सही समय है. बारीश और सावन के मौसम में अधिकतर लोग यहा आते है और यहा के मौसम का आनंद लेते है.

    6.   प्रतापगड़ किला


लोकेशन: सातारा, महाराष्ट्र.

कैसे पहुचे: ट्रेन के जरिए– सातारा रेल्वे स्टेशन प्रतापगड़ के पास का रेल्वे स्टेशन है वहा से आप प्रतापगड़ के लिए टैक्सी कर सकते है.
रोड़ के जरिए- महाबलेश्वर से लगभग 25 किमी दूर, यह किले तक कैब और बसों द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है. यह लगभग एक घंटे की यात्रा है और मुख्य किले की सीढ़ियों तक आधे घंटे की अतिरिक्त बढ़ोतरी है.

जानकारी: प्रतापगड़ किला सातारा में स्थित एक बड़ा किला है. लड़ाई के स्थल के रूप में महत्वपूर्ण, किला अब एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है. प्रतापगढ़ किला पोलादपुर से 15 किलोमीटर और महाबलेश्वर से 23 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है, जो क्षेत्र का एक लोकप्रिय हिल स्टेशन है. यह किला समुद्र तल से 1,080 मीटर (3,540 फीट) ऊंचा है. राजा छत्रपति शिवाजी महाराज ने नीरा और कोयना नदियों के तट की रक्षा के लिए और पार पास की रक्षा के लिए इस किले के निर्माण का कार्य करने के लिए अपने प्रधानमंत्री मोरोपंत त्र्यंबक पिंगले को नियुक्त किया. इस किले का काम 1656 में पूरा हुआ. छत्रपति शिवाजी महाराज और अफज़ल खान के बीच प्रतापगढ़ की लड़ाई 10 नवंबर 1659 को इस किले की प्राचीर से नीचे लड़ी गई थी. प्रतापगढ़ आमतौर पर महाबलेश्वर के हिल स्टेशन से एक दिन की यात्रा के रूप में जाना जाता है, जो 25 किलोमीटर दूर स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है. एसटी बस सेवा ने दशकों से प्रतापगढ़ सहित महाबलेश्वर के आस-पास के स्थानों के लिए दैनिक भ्रमण सेवाएं चलाई हैं. कई स्कूल किले में शैक्षिक यात्राओं की व्यवस्था भी करते हैं. यह किला के क्षेत्र में कई ट्रेकिंग मार्ग भी है.

जाने के लिए सबसे अच्छा समय: थंड के मौसम यहा ज्यादातर लोग यहा ट्रेकिंग के लिए आते है. क्योंकि यह जगह महाबलेश्वर के पास है.

    7.   कर्नाला पक्षी अभयारण्य


लोकेशन: पनवेल तालुका, रायगड़ जिला.

कैसे पहुचे: रोड के जरिए-  अभयारण्य मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से थोड़ा दूर है और मुंबई-गोवा हाईवे या NH17 पर से आसानी से पहुँचा जा सकता है. मुंबई से 65 किमी और पुणे से 112 किमी की दूरी पर अभयारण्य सड़कों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है.
ट्रेन के जरिए- पनवेल रेल्वे स्टेशन अभयारण्य के सबसे पास का है. पनवेल रेल्वे स्टेशन से आप अभयारण्य के लिए टॅक्सी कर सकते है.    

जानकारी: अभयारण्य ऐतिहासिक कर्नाला किले के बिचोबीच केंद्रित है. यह पनवेल से 12 किमी दूर स्थित है. पक्षी अभयारण्य मुंबई क्षेत्र में पक्षी-दर्शकों और ट्रेकर्स के लिए एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है. अभयारण्य 222 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों का घर है, जिनमें 161 निवासी प्रजातियां हैं, 46 सर्दीयोंकी प्रवासी प्रजातियां हैं, तीन ब्रीडिंग प्रवासी प्रजातियां हैं. सात प्रजातियां प्रवासियों की हैं और पांच प्रजातियां आवारा हैं. पक्षी मध्य एशिया, यूरोप, उज्बेकिस्तान, साइबेरिया से आते हैं. यहा पे एक आदमी के लिए 35 रू. एन्ट्री फी है और 2 व्हिलर पार्किंग के लिए 25 रू. फी है. अभयारण्य में पहाड़ी की चोटी पर स्थित कर्णला किला है, यह लगभग 1 घंटे की मध्यम कठिन ट्रेक है कर्नाला किले के लिए.

जाने के लिए सबसे अच्छा समय: अभयारण्य की यात्रा के लिए अक्टूबर से अप्रैल का समय सबसे अच्छा है. सर्दियों के मौसम के दौरान, प्रवासी पक्षी अभयारण्य का सबसे बड़ा आकर्षण हैं. दूसरी ओर, मानसून की शुरुआत में बड़ी संख्या में पक्षी, जैसे कि स्वर्ग फ्लाईकैचर, शमा और मालाबार सीटी बजाते हैं, जो जंगल के माध्यम से बजने वाली आत्मीय धुनों पर थिरकते हैं.

    8.   राजगड किला


लोकेशन: पुणे

कैसे पहुचे: ट्रेन के जरिए- अगर आप ट्रेन से आने कि सोच रहे हो तो फिर आपको पुणे तक ट्रेन से आना होगा और फिर पुणे रेल्वे स्टेशन से आप पाली के लिए टॅक्सी पकड सकते है. पाली पुणे से 68 कीमी की दुरी पर है.

जानकारी: राजगड़ (रूलिंग फोर्ट) एक पहाड़ी किला है जो पुणे जिले में स्थित है पहले यह मुरुमदेव के नाम से जाना जाता था, किला लगभग 26 वर्षों तक छत्रपति शिवाजी महाराज के शासन में मराठा साम्राज्य की राजधानी था, जिसके बाद राजधानी को रायगड़ किले में स्थानांतरित कर दिया गया था. तोरण नामक एक निकटवर्ती किले से खोजे गए खजाने का इस्तेमाल पूरी तरह से राजगड़ किले को बनाने और मजबूत करने के लिए किया गया था. राजगड़ किला पुणे के दक्षिण-पश्चिम में लगभग 60 किमी और सह्याद्रि रेंज में नासरपुर से लगभग 15 किमी दुरी पर पश्चिम में स्थित है. यह किला समुद्र तल से 1,376 मीटर (4,514 फीट) दूरी पर है.
     किला पर्यटन के द्रष्टी से एक महत्त्वपूर्ण स्थल है और विशेष रूप से मानसून के दौरान इसकी सबसे अधिक मांग है. पर्यटक किले पर रात भर रुकना पसंद करते हैं, क्योंकि यह किला बहुत बड़ा है और एक ही दिन में इसका पता नहीं लगाया जा सकता है. किले के पद्मावती मंदिर में लगभग 50 लोग बैठ सकते हैं. पानी की टंकियाँ पूरे साल भर ताज़े पानी देती हैं. राजगढ़ की तलहटी के ग्रामीण इन पर्यटकों को स्थानीय प्राचीन वस्तुएँ और वस्तुएँ बेचते हैं.

जाने के लिए सबसे अच्छा समय: सभी पर्यटक विशेष रूप से यहा बारीश और थंड के मौसम में आना पसंद करते है. क्योंकी किले पर इस मौसम में हरीयाली रहती है और आप पुरे किले का आनंद उठा सकते हैं.

    9.   तपोला

लोकेशन: महाबलेश्वर, सातारा.

कैसे पहुचे: अगर आप तपोला जाना चाहते हैं महाबलेश्वर पहुंच कर आप तपोला जा सकते है. महाबलेश्वर ट्रेन और रोड से अच्छि तरह से जुडा हुआं है आप ट्रेन और गाडी दोनो का इस्तेमाल करके महाबलेश्वर पहुंच कर तपोला सकते है.

जानकारी: महाबलेश्वर की घाटियों में स्थित, तपोला एक गाँव है जहाँ प्रकृति बहुत उदार रही है. 'मिनी कश्मीर' के रूप में प्रसिद्ध, तपोला में कुछ मनोरम प्राकृतिक सुंदरता है, जो इसे प्रकृति के अनुभव के लिए एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाती है. खूबसूरत स्ट्रॉबेरी के खेत यहां के कुछ आर्कषनो में से एक हैं. यहा से आप सह्याद्री की पहाड़ीयों से कई आर्कषक स्थल देख सकते है. तपोला प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और साहसिक प्रेमियों के लिए लोकप्रिय है जो यहा ट्रैकिंग का भी आनंद ले सकते हैं और प्राकृतिक दृश्य का आनंद ले सकते हैं. इस जगह की सुंदरता का आनंद लेने के अलावा, आप इस क्षेत्र में कई साहसिक खेलों का आनंद भी ले सकते हैं. जंगल ट्रेक, विशेष रूप से वासोटा किले के लिए ट्रेक रोमांचकारी है और पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रहा है.

जाने के लिए सबसे अच्छा समय: आप पुरे साल भर में कभी भी तपोला जा सकते है. यहा लोग पुरे साल में कभी भी छुट्टीयां मनाने आते है, और इसका आनंद उठाते है.

    10.   विसापुर किला


लोकेशन: मलावली, विसापुर

कैसे पहुचे: ट्रेन के जरीए- आप पुणे से मलावली के लिए ट्रेन पकड़ सकते है, मलावली रेल्वे स्टेशन किले से 10 किमी की दुरी पर है.


जानकारी: इस किले को मराठा साम्राज्य के पहले पेशवा बालाजी विश्वनाथ द्वारा 1713-1720  के दौरान बनाया गया था, विसापुर किला लोहागड़ की तुलना में बहुत बाद में बनाया गया था लेकिन दोनों किलों के इतिहास निकट से जुड़े हुए हैं. विसापुर किला अपने जुड़वां किले- लोहागड़ की तुलना में अधिक बड़ा और ऊंचा है. किले के भीतर गुफाएँ, पानी के कुंड, एक सजाया हुआ मेहराब और पुराने घर हैं. बाहरी या बरामदे की दीवारों से घिरी इन दो छतविहीन इमारतों के बारे में कहा जाता है कि ये कभी सरकारी कार्यालय थीं. यहा एक कुआँ है जिसे स्थानीय किंवदंती कहते हैं कि इसे पांडवों ने बनवाया था.

जाने के लिए सबसे अच्छा समय: विसापुर किले के सवारी के लिए सबसे अच्छा समय बारीश का शुरुवाती मौसम जुन के बिच से थंड के मौसम की समाप्ति तक, मानसून के दौरान ट्रेक और आसपास के दृश्य विशेष रूप से सुंदर होते हैं, यह ट्रेक सबसे लोकप्रिय होता है.

Best 10 places to visit in Nahik City | नाशिक में घुमने के लिए 10 सबसे बढिया जगह.

KNOWLEDGE GURUJI July 28, 2019 Add Comment

नाशिक में घुमने के लिए 10 सबसे बढिया जगह. | Best 10 places to visit in Nahik City

1.   सुला वाईनयार्ड्स


         सुला वाईनयार्ड्स एक वाईन और दाख की बारी है जो कि नाशिक के गंगापुर में स्थित है. 2000 में अपनी पहली वाइन के लॉन्च के बाद, सुला ने नासिक में अपनी मूल 30 एकड़ परिवार की संपत्ति का विस्तार किया और लगभग पूरे नासिक और महाराष्ट्र राज्य में लगभग 1800 एकड़ जमीन पर अपना विस्तार कर लिया. सुला वाइनयार्ड और वाइनरी की यात्रा सभी उम्र के लोगों के लिए एक सुखद अनुभव है. यहा पे आपको 250 रूपये में 30 मिनट की टुर मिलती है.
जिसमें आपको पुरे सुला वाईनयार्ड्स की सैर मिलती है. इधर आपको अंगुर की तरह- तरह के ब्रांड की वाईन मिलेगी.
         सुला वाईन पुरा हफ्ता 11.30 से लेकर 6.30 बजे तक चालु रहता है और सिर्फ ड्राय डे पर ही ये बंद रहता है.यहा पे हर उमर के लोगो के लिए मनोरंजन के साधन है. जो लोग छुट्टीयोंमे घुमने की सोच रहे है वो यहा आकर अपना कुछ अच्छा समय बिता सकते है.
Address:  Gat 36/2, Govardhan Village, Off, Gangapur-Savargaon Rd, Nashik, Maharashtra 422222

  2.     पांडवलेनी गुफा


            भारत में महाराष्ट्र में नासिक के केंद्र के दक्षिण में लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, पांडवलेनी गुफाएँ प्राचीन रॉक-कट गुफाएँ हैं जो कि त्रिवेष्मी पहाड़ियों की तराई में स्थित हैं। ये गुफाएं अब 2000 से अधिक वर्षों से अस्तित्व में हैं और तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व और दूसरी शताब्दी ईस्वी सन् के बीच की अवधि की हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये गुफाएँ आज तक अपना महत्व और महत्व रखती हैं। पांडवलेनी गुफाएँ 24 गुफाओं का एक समूह है जो हीनयान बौद्ध धर्म का प्रतिनिधित्व करती हैं। रहस्यवादी गुफाओं में संगीतमय फव्वारे, संग्रहालय और भोजन के विभिन्न आउटलेट शामिल हैं। कई मठों, मंदिरों, पानी की टंकियों, स्तंभों और नक्काशी के अंदर को भी पाया जाता है.
           यह गुफांए नासिक की गुफांए, पांडवलेनी गुफांए, पांडु गुफांए के नाम से प्रसिद्ध है. गुफा के अंदर सुंदर मूर्तियां, कक्ष, अद्वितीय जल संरचनाएं और पत्थर की सीढ़ी भी हैं। दादा साहेब फालके स्मारक पांडवलेनी गुफाओं के तल पर स्थित है । शीर्ष पर पहुंचने और लुभावने दृश्यों का आनंद लेने के लिए पर्यटकों को लगभग 200 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ट्रेकिंग का आनंद लेने के लिए लोग अक्सर इस जगह को भेंट देते हैं। इसी समय, गुफाओं का स्थान एक प्रमुख पवित्र बौद्ध स्थल है। यह पांडवलेनी गुफाओं को एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बनाता है, जो पूरे साल बड़ी संख्या में पर्यटकों द्वारा दौरा किया जाता है.
          यहा पे जाने के लिए आपको 5 रूपयें कि एंट्री फी देनी पडती है. जो की शुक्रवार को फ्री है.   

3.   सप्तश्रुंगी वणी गड


            सप्तश्रृंगी भारत के महाराष्ट्र राज्य में नासिक से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हिंदू तीर्थस्थल है. यह संस्कृत के 'सप्त' शब्द का एक मिश्रण है जिसका अर्थ है सात और 'श्रुंग' जिसका अर्थ है शिखर. इसे सप्तश्रृंगी गड इस लिए भी कहा जाता है क्योंकी हिंदू परंपराओं के अनुसार, सप्तश्रृंगी निवासिनी देवी सात पर्वत चोटियों के भीतर निवास करती हैं. यह नंदूरी, महाराष्ट्र में नासिक के पास एक छोटे से गाँव, कलवन तालुका में स्थित है. मराठा और कुछ भील जनजाति लंबे समय से देवी की पूजा करते हैं और कुछ उनकी कुलादिवत के रूप में पूजा करते हैं. गड पर चढ़ने के लिए 510 सिडीयां हैं. यह मंदिर को महाराष्ट्र के "तीन और आधा शक्तिपीठों" में से एक के रूप में भी जाना जाता है. यह मंदिर भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक है और यह एक ऐसा स्थान है जहाँ सती के (भगवान शिव की पत्नी) अंग, उनके दाहिने हाथ के गिरने की सूचना है। महाराष्ट्र के साढ़े तीन शतकपीठ में से इसका आधा शक्तिपीठ है. न केवल पहाड़ियों को देखने के लिए अविश्वसनीय हैं, बल्कि पहाड़ियों पर जंगलों को औषधीय जड़ी बूटियों से भरा हुआ है. वास्तव में, हिंदू परंपरा के अनुसार, जब लक्ष्मण अचेत अवस्था में पड़े हुए थे और केवल 'संजीवनी' जड़ी बूटी से जागृत हो सकते थे, भगवान हनुमान ने जड़ी-बूटी की तलाश में इन पहाड़ियों पर उड़ान भरी.
           सप्तश्रृंगी मंदिर भी पहाड़ी श्रृंखला में स्थित है। यह मंदिर हिंदू परंपराओं द्वारा उच्च उच्चारण में आयोजित किया जाता है। परंपराओं से संकेत मिलता है कि महान देवी सप्तश्रृंगी निवासिनी सात पहाड़ियों के बीच स्थित हैं। वास्तव में, भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के साथ महान देवी का आशीर्वाद लेने के लिए स्वयं इन पहाड़ियों पर आए थे।

4.     हरिहर किला


            हर्षगढ़ किला जिसे हरिहर किले के नाम से जानते है, नाशिक शहर से 40 किमी, इगतपुरी से 48 किमी, महाराष्ट्र के नासिक जिले में घोटी से 40 किमी दूर स्थित है। यह नासिक जिले का एक महत्वपूर्ण किला है, और इसका निर्माण गोंडा घाट के माध्यम से व्यापार मार्ग को देखने के लिए किया गया था. इसके अजीबोगरीब रॉक-कट चरणों के कारण इसे कई आगंतुक प्राप्त करते हैं. हरिहर किला पंकज पंचरिया काल के दौरान बनाया गया था. इसे 1636 में त्रंबक और पूना किलों के साथ खान ज़माम को सौंप दिया गया था. 1818 में 17 अन्य किलों के साथ कैप्टन ब्रिग्स ने  इस किले पर कब्जा कर लिया था.
            किले से दो आधार गाँव जुडें हैं, हरसवाडी और निर्गुदपाड़ा. हरसवावाड़ी त्र्यंबकेश्वर से 13 किमी दूर है. किले का दूसरा आधार गाँव निर्गुदपाड़ा / कोटमवाड़ी है जो घोटी से 40 किमी दूर है जो खुद नासिक से 48 किमी और मुंबई से 121 किमी दूर है. घोटी से त्र्यंबकेश्वर तक बस या निजी वाहन से जा सकते हैं. किले से वापसी के लिए आपको को यह ध्यान रखना चाहिए कि त्र्यंबकेश्वर से आखिरी बस शाम 6:30 बजे घोटी तक जाती है.         हरसगुड़ी की चढ़ाई निर्गुदपाड़ा से अधिक आसान है. एक छोटे से प्रवेश द्वार के साथ भंडारण गृह को छोड़कर किले पर कोई अच्छी संरचनाएं नहीं बची हैं. किले के केंद्र में रॉक-कट पानी के झरने की एक श्रृंखला है. किले पर सभी स्थानों की यात्रा में लगभग एक घंटे का समय लगता है. कई स्थानों पर सिडीयां बहुत कसी हुई हैं, जिससे एक बार में एक ही व्यक्ति चढ़ या उतर सकता है.

5.     अंजनेरी


      नासिक-त्र्यंबकेश्वर की पर्वत श्रृंखला के किलों में से एक अंजनेरी किला है. अंजनेरी किले को भगवान हनुमान का जन्मस्थान माना जाता है. अंजनेरी, त्र्यंबक रोड द्वारा नासिक से 20 किमी दूर स्थित है. यह विशेष रूप से बारिश के मौसम में स्थानीय नाशिकियों के लिए एक प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थल बन गया है.
      अंजनेरी नासिक शहर का एक आकर्षण है, जो त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण किला भी है. समुद्र तल से 4,264 फीट (1,300 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित, यह नासिक और त्र्यंबकेश्वर के बीच स्थित है. अंजनेरी हनुमान का जन्मस्थान है, और इसका नाम हनुमान की मां अंजनी के नाम पर रखा गया है. अंजनेरी पे 108 जैन गुफा मिली थी जो 12 वी शताब्दी से जुडी हुई थी. अंजनेरी के आसपास के क्षेत्र पर कभी वीरसेन अहीर (अभीर) ने बडें समय के लिए शासन किया, जिसने इसे अपनी राजधानी बनाया.
        अपने आध्यात्मिक महत्व के अलावा, अंजनेरी हाइकर्स के लिए भी एक लोकप्रिय स्थान है.

6.     मांगी तुंगी


            मंगी-तुंगी, नासिक से लगभग 125 किमी दूर ताराबाद के पास स्थित पठार के साथ एक प्रमुख जुड़वाँ शिखर है. मंगी, समुद्र तल से 4,343 फीट (1,324 मीटर) ऊँचा, पश्चिमी शिखर और तुंगी, 4,366 फीट (1,331 मीटर) ऊँचा, पूर्वी है. मंगी-तुंगी उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) के प्रसिद्ध शहर और जिले में धुले से केवल 100 किमी दूर है.
          वहाँ कई मंदिर हैं जो जैन धर्म में पवित्र माने जाता है. यह पद्मासन और कायोत्सर्ग सहित कई मुद्राओं में तीर्थंकरों की छवियों को चित्रित करता है. कभी-कभी, इसे सिद्धक्षेत्र के रूप में वर्णित किया जाता है, जिसका अर्थ है आत्मज्ञान की स्थिति का प्रवेश द्वारा.
          लगभग 3,500 (7,000 अप एंड डाउन) चरणों में चोटी के पैर होते हैं, जो ऐतिहासिक और धार्मिक प्रमुखता के कई स्मारकों से समृद्ध है। इसके अलावा, महावीर, ऋषभनाथ, शांतिनाथ और पार्श्वनाथ जैसे महान तीर्थंकरों के नाम पर कई गुफाएँ हैं। कार्तिक (सितंबर-अक्टूबर) के दौरान यहाँ एक भव्य मेला प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है जहाँ लोग बड़ी संख्या में गवाह समारोह में आते हैं।

7.     ब्रह्मगिरि


           ब्रह्मगिरि सह्याद्री की सीमा में एक विशाल पहाड़ी है। यह महाराष्ट्र राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शंकु है. इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 1295 मीटर है. ब्रह्मगिरि के दक्षिण में सह्याद्री की कुछ चोटियाँ हैं जैसे कालसुबाई, अलंग, कुलंग, मदन। यह पहाड़ी त्र्यंबकेश्वर तालुका में है. यहां बहुत बारिश होती है.
           ब्रह्मगिरी पहाड़ियों से, वैतरण नदी , अहिल्या नदी और गोदावरी नदी का उद्गम होता है। वैतरण पश्चिम में उतरता है और अरब सागर तक जाता है, जबकि गोदावरी आंध्र प्रदेश में राजमुंदरी से पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक है.
           कई लोग इस पर्वत पर यात्रा करने के लिए या प्रदिक्षणा करने के लिए आते हैं. त्र्यंबकेश्वर के दर्शन और ब्रह्मगिरी दर्शन की परंपरा पुरानी है. 
           इस पहाड़ पर चढ़ने में आमतौर पर तीन से पांच घंटे लगते हैं. सड़क पर बड़ी संख्या में बंदर हैं. ऊपर से क्षेत्र का अवलोकन किया जाता है. एक कहानी यह भी है कि शंकर ने जाटा मारा और गंगा / गोदावरी नदी की उत्पत्ति हुई.

8.    दुगरवाडी


           दुगरवाड़ी जलप्रपात नासिक से त्र्यंबकेश्वर रोड पर 30 किलोमीटर और जवार रोड से 2 किलोमीटर दूर है. यहा पे बारीश के मौसम में लोगों को ध्यान रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि जल स्तर अचानक बढ़ जाता है.
           दुगरवाड़ी मुंबई से 177 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. दुगारवाड़ी झरने पहाड़ों पर छाए हुए, हरियाली के बीच पानी का एक सुंदर झरना है. दुगरवाड़ी झरना सह्याद्री जंगलों की हरी परतों के भीतर एक गहरा हरा रत्न है. यह झरना सांपगाव के पार्किंग से कुछ किलोमीटर पैदल चलने के अंतर दुर है.
           दुगरवाड़ी झरने को देखने के लिए लोग दुर दुर से आते है. यहा पे बारीश के मौसम बहुत भीढ होती है. लोग यहा अकसर ट्रैकींग करने के लिए आते है.

9.     गंगापुर डैम


            इस बाँध को देखने लिए लोग दुर से आते है. यह नासिक के गंगापुर गाव में है.  यह बाँध सुला वाईनयार्ड्स के पास है. गंगापुर बाँध गोदावरी नदी पर बना एक मिट्टी का बाँध है, और एशिया का सबसे लंबा मिट्टी का भंडार है। लोग नदी के किनारे एक शांतिपूर्ण दोपहर बिताने के लिए आते हैं, नदी के आनंदमय, मनोरम दृश्यों का आनंद लेते हुए, एक सपने से सीधे बाहर। शाम को प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है, और अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक नई नौका विहार की सुविधा है।
            गंगापुर बाँध, भारत में महाराष्ट्र राज्य में नासिक के पास गोदावरी नदी पर बना एक बाँध है. सबसे कम नींव से ऊपर बांध की ऊंचाई 36.59 मीटर (120.0 फीट) है, जबकि लंबाई 3,902 मीटर (12,802 फीट) है. मात्रा सामग्री 4,612 किमी 3 (1,106 घन मील) और सकल भंडारण क्षमता 215,880.00 किमी 3 (51,792.37 घन मील) है.
            जलाशय क्षेत्र में गाद जमाव के कारण बांध की भंडारण क्षमता धीरे-धीरे कम हो गई है. क्षेत्र में उच्च सभ्यता के कारण नासिक की ओर दाहिनी ओर की नहर भी बंद है. इन दो कारणों के लिए, एक अपस्ट्रीम बांध, काशीपी बांध, का निर्माण किया गया है जो 1998 में खोला गया था.

10.  त्रिंगलवाडी किला


           त्रिंगलवाड़ी किला नासिक जिले के इगतपुरी तालुका में स्थित है. यह थल घाट से गुजरने वाले प्राचीन व्यापार मार्ग पर स्थित है. किला ग्राम त्रिंगलवाड़ी के पास स्थित है. त्रिंगलवाड़ी सिंचाई बांध जो गाँव के करीब है, 1978 में बनाया गया था.
           त्रिंगलवाड़ी गाँव इगतपुरी से 7 किमी दूर स्थित है. इगतपुरी मुंबई-नासिक रेल मार्ग के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग NH 160 पर स्थित है. इगतपुरी से त्रिंगलवाड़ी गाँव तक पहुँचने के लिए दो मार्ग हैं, पहला इगतपुरी शहर से होकर गुजरता है और दूसरा घोटी में NH160 पर एक उत्तरी निकास से होकर और आगे जाता है ग्राम बलायाडुरी के
माध्यम से. त्रिंगलवाड़ी किला एक पहाड़ी पर स्थित है जो उत्तर-दक्षिण की ओर चलती है. यह एक मेसा रॉक फॉर्मेशन है। चढ़ाई बहुत आसान है और गांव से किले के शीर्ष तक पहुंचने में लगभग 30 मिनट लगते हैं.
          किले की तलहटी में एक गुफा है जिसे सुंदर नक्काशीदार प्रवेश द्वार के साथ पांडव लेन कहा जाता है और गर्भगृह में ऋषभनाथ की एक पत्थर की मूर्ति है. गुफा में एक बड़ा सा मंडप है. किले का पश्चिमी द्वार वास्तुकला की एक अनूठी संरचना है. सिढी और प्रवेश द्वार एक ही चट्टान से उकेरा गया है. प्रवेश द्वार के पास वीरहानुमान और मारुति की एक मूर्ति है और प्रवेश द्वार के शीर्ष पर खुदी हुई दो शारिबीडोल्स हैं. किले में पुरानी इमारतों के खंडहर और एक छोटाभवनमाता मंदिर है. किले में पहाड़ी के पश्चिमी हिस्से में एक गुफा और एक चट्टान का पानी का झरना है.     

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